-
453
छात्र -
379
छात्राएं -
43
कर्मचारीशिक्षण: 40
Non teaching: 3
:
परिकल्पना
- के. वि. सं. उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक प्रयासों के माध्यम से उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए अपने छात्रों को ज्ञान/मूल्य प्रदान करने और उनकी प्रतिभा, उत्साह और रचनात्मकता का पोषण करने में विश्वास रखता है।
उद्देश्य
- शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना है।
- स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने और गति निर्धारित करने के लिए।
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) आदि जैसे अन्य निकायों के सहयोग से शिक्षा में प्रयोग और नवाचारों को शुरू करना और बढ़ावा देना।
- राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करना और बच्चों में “भारतीयता” की भावना पैदा करना।

विद्यालय के बारे में
उत्पत्ति
जम्मू और कश्मीर राज्य की कश्मीर घाटी में वायु सेना स्टेशन में केन्द्रीय विद्यालय नंबर 2 श्रीनगर विद्यालय 1978 में एक प्राथमिक विद्यालय के रूप में शुरू हुआ। विद्यालय अपने छात्रों को राष्ट्र निर्माण में सेवाओं और जिम्मेदारियों के लिए तैयार करता है और लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष समाज में गहरा विश्वास बढ़ाता है। शिक्षाविदों और खेलों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए, कई गुणा इनडोर और बाहरी सुविधाओं का चयन किया गया है।
विद्यालय के दृष्टिकोण के बारे में
शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए
उत्कृष्टता को आगे बढ़ाने और स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में गति निर्धारित करने के लिए
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद आदि ।
विद्यालय के उद्देश्य के बारे में
शिक्षा का एक साझा कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केंद्र सरकार के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना उत्कृष्टता को आगे बढ़ाने और स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में गति निर्धारित करने के लिए;
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद आदि ।
संदेश
श्री विकास गुप्ता, भा. प्र. से., आयुक्त
शिक्षक दिवस 2026 के अवसर पर मैं देश के समस्त शिक्षक समुदाय को अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करता हूँ।
आज जब शिक्षा का क्षेत्र तीव्र गति से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, तब भी शिक्षण की मूल भावना और उसका सार शाश्वत है। देशभर के केन्द्रीय विद्यालयों में हमारे शिक्षक पूर्ण समर्पण, प्रतिबद्धता और अटूट उत्साह के साथ शिक्षा के उद्देश्य को आगे बढ़ा रहे हैं।
श्री हर्षित मिश्रा
उप आयुक्त
“शिक्षा का अर्थ यह नहीं है कि आपके मस्तिष्क में ऐसी बहुत – सी बातें इस तरह भर दी जाये कि अंतर्द्वंद्व होने लगे और आपका मस्तिष्क उन्हें जीवन भर पचा न सके। जिस शिक्षा से हम अपना जीवन निर्माण कर सकें, मनुष्य बन सकें, चरित्र गठन कर सकें और विचारों का सामंजस्य कर सकें, वही वास्तव में शिक्षा कहलाने योग्य है।” – स्वामी विवेकानंद उपरोक्त शाश्वत शब्द केंद्रीय विद्यालय संगठन- भारत के शिक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय को परिभाषित करते हैं। केंद्रीय विद्यालय संगठन गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक जीवंत और प्रमुख शैक्षणिक संस्थान है। केंद्रीय विद्यालय संगठन जम्मू संभाग की स्थापना 1984 में हुई थी और वर्तमान में इसके अधिकार क्षेत्र में जम्मू और कश्मीर में स्थित 38 के. वि. आते हैं, जिनमें छात्रों के बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए प्रभावी प्रबंधन और शिक्षकों की एक समर्पित, अच्छी तरह से सुसज्जित और प्रतिबद्ध टीम कार्यरत है। छात्रों को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए नियमित आधार पर बहु-विषयक पाठ्यचर्या संबंधी गतिविधियों की एक श्रृंखला आयोजित की जाती है। प्रौद्योगिकी और वैश्वीकरण की लगातार परिवर्तनशील दुनिया के साथ चलने में हमारे छात्रों को सक्षम बनाने के लिए ‘सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास’ पर हमारा अधिक बल है। हम “कमजोरों को प्रेरित करने, औसत को संबोधित करने और प्रतिभाओं को चुनौती देने” के सिद्धांत के साथ समावेशी शिक्षा में विश्वास रखते हैं। हमें अपने छात्रों को अगली पीढ़ी के संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिकों के रूप में विकसित करने में सहायता करने पर गर्व है। हमारे छात्रों ने अतीत में कई उपलब्धियां हासिल की हैं और मुझे पूरी आशा है कि उत्कृष्टता और उपलब्धियों की यह खोज भविष्य में भी जारी रहेगी।
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श्री अनिल शर्मा
प्राचार्य
“तुम्हारे अंदर सचेतनता है; बस थोड़ी खोजबीन की जरूरत है"। हम हमेशा बात करते हैं कि छात्रों की सफलता की कुंजी शिक्षक के हाथ में है, हालांकि मेरा मानना है कि कोई किसी को कुछ नहीं सिखा सकता। हमारे संस्कृत के एक श्लोक में इसी बात का उल्लेख है कि व्यक्ति बढ़ता है; एक चौथाई गुरु के कारण, एक चौथाई अपनी बुद्धि से, एक चौथाई परिवेश से और एक चौथाई केवल समय के साथ। एक बच्चे को शिक्षित करने के लिए पूरे गांव की जरूरत होती है और वास्तव में यह सभी वयस्कों की जिम्मेदारी है कि वे एक ऐसा अनुकूल माहौल बनाएं जहां प्रभावी शिक्षा हो। एक शिक्षा प्रणाली जो बच्चे की कल्पनाशीलता को विकसित करती है वह उस प्रणाली की तुलना में अधिक समृद्ध है जो ऐसा नहीं करती है। कल्पना ही वह जगह है जहां नए विचार पैदा होते हैं और प्रगति संभव होती है। इससे छात्रों को स्वयं का पता लगाने और अपनी क्षमता के बारे में जागरूक होने का मौका मिलता है। स्कूल एक ऐसा मंच है जहां जहां तक संभव हो, समस्या समाधान, नेतृत्व, अनुकूलन क्षमता, समय प्रबंधन, सह-शैक्षणिक विकास और कई अन्य कौशल सेटों का अधिकतम प्रदर्शन दिया जाना चाहिए। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर 2, वायु सेना स्टेशन श्रीनगर में, हम न केवल बच्चे की शैक्षणिक और सह-शैक्षिक आवश्यकताओं का पोषण करना चाहते हैं, बल्कि हम ऐसी यादें भी बनाना चाहते हैं, जिन्हें बच्चे जीवन भर संजोकर रखेंगे। प्रत्येक वयस्क के विवेक, प्यार, देखभाल और सम्मान के तहत, एक व्यक्ति एक आत्मविश्वासी व्यक्तित्व में बदल जाता है।
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पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2 वायुसेना स्थल, श्रीनगर को उत्तरी क्षेत्र मे द्वितीय पुरस्कार के लिए चुना गया। उप आयुक्त महोदय द्वारा शील्ड एवं प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
विद्यालय में अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर आईएसआरओ के वैज्ञानिक द्वारा अतिथि व्याख्यान दिया गया।
उधमपुर स्थित जेडटीए में आयोजित सीएटीसी शिविर में 11 कैडेटों ने भाग लिया। कैडेट बारका ने सार्वजनिक भाषण, एंकरिंग, पोस्टर मेकिंग और रस्साकशी में 4 स्वर्ण पदक जीते। कैडेट फराना ने पोस्टर मेकिंग में स्वर्ण पदक जीता, कैडेट यशवंत शर्मा ने भाषण में स्वर्ण पदक जीता। कैडेट रिधमा और इकरा ने रस्साकशी में स्वर्ण पदक जीता।
उपलब्धियाँ
शिक्षक
विद्यार्थी
नवाचार
खिलौना पुस्तकालय
केन्द्रीय विद्यालय के दो शिक्षकों को "राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2023" के लिए चुना गया
श्रेष्ठ विद्यालय टॉपर्स
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा दसवीं और बारहवीं कक्षा
दसवीं कक्षा
बारहवीं कक्षा
विद्यालय परिणाम
वर्ष 2025-26
शामिल हुए 39 उत्तीर्ण 39
वर्ष 2023-24
शामिल हुए 44 उत्तीर्ण 44
वर्ष 2022-23
शामिल हुए 57 उत्तीर्ण 57
वर्ष 2021-22
शामिल हुए 50 उत्तीर्ण 49
वर्ष 2025-26
शामिल हुए 26 उत्तीर्ण 26
वर्ष 2023-24
शामिल हुए 44 उत्तीर्ण 44
वर्ष 2022-23
शामिल हुए 45 उत्तीर्ण 39
वर्ष 2021-22
शामिल हुए 32 उत्तीर्ण 31